कृपालुजी महाराज की शिक्षाएँ क्यों आज भी महत्वपूर्ण हैं
आज का मनुष्य पहले से अधिक शिक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और भौतिक रूप से समृद्ध दिखता है, लेकिन भीतर की बेचैनी, तनाव और असंतोष भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे समय में जगद्गुरु कृपालु महाराज की शिक्षाएँ एक ऐसे दर्पण की तरह सामने आती हैं, जो मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप, जीवन के सच्चे उद्देश्य और स्थायी सुख के मार्ग का स्पष्ट दर्शन कराती हैं। उनकी वाणी और आचरण दोनों यह बताते हैं कि आध्यात्मिकता कोई अलग “सेक्टर” नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र को प्रकाशित करने वाली रोशनी है। कृपालुजी महाराज की शिक्षाएँ सबसे पहले मनुष्य को यह समझने में मदद करती हैं कि वह केवल शरीर, पद, धन या रिश्तों का नाम नहीं है, बल्कि एक शाश्वत आत्मा है, जिसका वास्तविक संबंध ईश्वर से है। जब यह दृष्टिकोण भीतर स्थापित होने लगता है, तो सफलता और असफलता, लाभ और हानि, प्रशंसा और निंदा — सबका अर्थ बदलने लगता है। व्यक्ति धीरे-धीरे प्रतिक्रियात्मक जीवन से निकलकर दिव्य मूल्यों पर आधारित जीवन जीने की ओर बढ़ता है। यही कारण है कि उनके बताये सिद्धांत किसी विशेष काल, देश या वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि हर युग और हर व्यक्ति के लिए ...