कृपालुजी महाराज की आध्यात्मिक शिक्षाओं को कब और कैसे अपनाएं
मानव जीवन में आध्यात्मिकता का महत्व तब समझ में आता है जब मनुष्य अपने भीतर शांति, तृप्ति और प्रेम की खोज करता है। ऐसे समय में जगद्गुरु कृपालु महाराज के उपदेश जीवन को एक नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने सदैव बताया कि सच्चा सुख और आनंद केवल ईश्वर प्रेम में ही संभव है। कृपालु महाराज का जीवन परिचय अत्यंत प्रेरणादायक है। उनका जन्म 5 अक्टूबर 1922 को उत्तर प्रदेश के मनगढ़ गाँव में हुआ था। बचपन से ही वे अध्यात्म, वेद और शास्त्रों में गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने वेदों और उपनिषदों की गूढ़तम व्याख्या कर जनमानस को प्रेम और भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर किया। उन्हें “जगद्गुरु” की उपाधि 1957 में वाराणसी के काशी विद्यापीठ में विद्वानों द्वारा प्रदान की गई, जो उनके ज्ञान की अद्वितीयता को दर्शाती है। कृपालु महाराज की आध्यात्मिक शिक्षाएं कृपालुजी महाराज की आध्यात्मिक शिक्षाओं का मूल सार है “ईश्वर और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण।” उनका मानना था कि आत्मा तभी मुक्त हो सकती है जब मन न केवल भक्ति करे, बल्कि पूर्ण श्रद्धा और प्रेम से भगवान को अर्पित हो जाए। उन्होंने व्यक्ति को सिखाया कि भक्ति कोई कर्मकांड नहीं, बल...